लगेगा नहीं
उमेर नजमी का एक शेर, जो दिल से लगा — “बिछड़ गए तो ये दिल ’उम्र भर लगेगा नहीं…”
The Journal
Stories, notes, and the making of the music.
उमेर नजमी का एक शेर, जो दिल से लगा — “बिछड़ गए तो ये दिल ’उम्र भर लगेगा नहीं…”
एक कसूर था, अब नासूर-सा है। — जो जा कर भी साथ रहते हैं, वो कभी जाते नहीं…
अकेलेपन का भी अपना मज़ा होता है। — इंसान सबसे ज़्यादा भीड़ में नहीं, अपने साथ रहते हुए बनता है।
जहाँ हर मोड़, किसी अधूरी कहानी का पता जानता है। — प्रयागराज के नाम एक नज़्म।
A verse — on being spoken of, and being worried for, and the quiet space between.
Thoughts...
Some thoughts stay with us longer than others
Nothing matches that.