The Journal

Made from memories.

Stories, notes, and the making of the music.

· 1 min

लगेगा नहीं

उमेर नजमी का एक शेर, जो दिल से लगा — “बिछड़ गए तो ये दिल ’उम्र भर लगेगा नहीं…”

shayariपसंद
· 1 min

ज़ख़्म

एक कसूर था, अब नासूर-सा है। — जो जा कर भी साथ रहते हैं, वो कभी जाते नहीं…

versepoetry
· 1 min

अकेलेपन

अकेलेपन का भी अपना मज़ा होता है। — इंसान सबसे ज़्यादा भीड़ में नहीं, अपने साथ रहते हुए बनता है।

versepoetry
· 1 min

Ye Shehar

जहाँ हर मोड़, किसी अधूरी कहानी का पता जानता है। — प्रयागराज के नाम एक नज़्म।

versepoetry
· 1 min

Mera Zikr, Meri Fikr

A verse — on being spoken of, and being worried for, and the quiet space between.

versepoetry
· 1 min

Thoughts...

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